कहानी का कार्यक्षेत्र

2024

Gender Equality

Agastya International foundation

Uttarpradesh

गुरु

Arvind Kumar

Step 1 महसूस करें

पहले हम जब अपने आसपास के लोगों को लैंगिक का सामान्य के बारे में बताएं तो लोगों को बहुत खराब लग रहा था कि यह छोटी सी बच्ची हमको सिखा रही है कि हम कैसे रहें और अपने परिवार में लड़के लड़कियों को कैसे समझ कर रखें तो हमने प्लान बनाया और एक एक छोटे से ग्रुप में निकालकर एक छोटी सी रैली निकाले जिससे लोग हमारी बात को सुने और समझ भी तो धीरे-धीरे एक दूसरे की बात को समझने लगे और अब तो कुछ काम भी हो गया है

हमने लैंगिक समानता के लिए अपना प्रोजेक्ट चुना है और देखें कि हमारे आसपास के लोगों में बहुत ज्यादा भेदभाव होता है यह एक बड़ी समस्या है यह हमारे देश की नहीं समस्या है यह तो पूरे विश्व की समस्या है इसीलिए इस समस्या को संयुक्त राष्ट्र सतत विकास में जोड़ दिया गया है अगर पूरा विश्व मिलकर इस पर कम करें तो शायद यह जल्दी ही समस्या खत्म हो जाएगी

इस समस्या से सबसे ज्यादा गांव के लोग प्रभावित हैं और कम पढ़े-लिखे लोग और अशिक्षित लोग प्रभावित है क्योंकि वह लड़कियों को बाहर नहीं जाने देते हैं और ना ही काम करने देते हैं अगर कोई लड़की कहे कि हमें बर्थडे पार्टी में जाना है और मैं शाम को लेट आऊंगी तो उनको जाने से मना कर देते हैं जबकि लड़का कहता है कि हम मम्मी बर्थडे पार्टी में जा रहे हैं और हम देर रात आएंगे तो उसको जाने देते हैं यह सब बहुत बड़ी समस्या है गांव में तो बहुत ज्यादा देखने को मिलती है शहरों में तो कुछ धीरे-धीरे लोग जागरुक हो रहे हैं लेकिन गांव में समस्या भी भी बनी है तो सबसे ज्यादा गांव के लोग इससे प्रभावित है

Step 2 Imagine

हमने लोगों को जागरूक करने के लिए कई प्रकार का प्लान बनाया है जैसे रैली के माध्यम से लोगों को जागरूक करेंगे या गांव में चौपाल लगाकर और नाटक नुक्कड़ करके किया जाएगा प्रशासन से भी सहयोग लिया जाएगा और स्लोगन के माध्यम से तथा नाटक नुक्कड़ के माध्यम से हम सोशल मीडिया को पर अपलोड करके भी लोगों को जागरूक करने का प्रयास करेंगे जिससे हमारे गांव शहर और देश से लैंगिक असमानता या लड़की लड़कियों में भेदभाव खत्म हो जाए

इस प्रकार हमने लोगों से जाकर बात किया और छोटी सी रैली के माध्यम से लोगों को पहले जागरूक किया कई बार जाने के बाद लोगों को लगा कि नहीं बच्चियों पड़ रही है तो कुछ तो सही कह रही होगी इसलिए उनकी बात को मनाना चाहिए और समझना चाहिए जिससे हो सकता है कि हम लोगों को फायदा हो और अब तो हमारे आसपास के लोग बहुत सुधर गए हैं

Step 3करना

हम अपने समाधान के लिए रैली निकालना का के बारे में सोचा है और गांव में नाटक नुक्कड़ करके लैंगिक समांतर के बारे में लोगों को जागरूक करेंगे और सोशल मीडिया के भी सहारे लोगों को बताएंगे की लड़की सामान्य में कैसे सुधार किया जा सकता हैऔर हमारे आसपास के लोगों में अब कुछ सुधार भी आया है

जब हम अपने आसपास के लोगों को बताया कि लड़की लड़कियों में भेदभाव नहीं करनी चाहिए क्योंकि आजकल लड़के लड़कियों में कोई अंतर नहीं है जो काम लड़के कर सकते हैं वह काम लड़कियां भी कर सकती हैं लड़कियां लड़कों से ज्यादा समझदार और सहनशील होती हैं पहले हमारे घर के बगल में कंकाल रहते थे और वह अपने बेटे और बेटियों में अलग-अलग नजर से देखते थे बेटे को अपने घर का चिराग समझते थे और बेटियों को कहते थे कि तुम तो पराया घर की बेटी हो तुम्हें तो घर छोड़ कर चले जाना है लेकिन जब मैं पता है कि जब बेटा कमाने के लिए घर से बाहर चला जाएगा तो बेटियां ही आपको काम आएंगे और आपके देखभाल करेंगे इसलिए बेटियों को कम नहीं रखना चाहिए हमने अपने दूसरे अंकल का एक उदाहरण लिया और अपने घर का उदाहरण लेकर उनको समझाया और दिखाई तो उनको लगा कि नहीं यह सही कह रही है इसलिए अब वह भी लड़कियों में भेदभाव को कम कर दिए

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जिनके घरों में आदमी और औरत में भेद होता है और लड़के लड़कियों में भेद होता था वह लोग पहले तो हमारी बात तुमको बहुत खराब लगी और वह हमको उल्टा पुल्टा भी कह रहे थे तुम छोटी सी होकर और हमको ज्ञान की बातें सीख रही हो लेकिन जब हम अपने टीचर के साथ गए और उनको समझाएं तो टीचर की बात से प्रभावित हुए और फिर भेदभाव को कम करने लगे और दोबारा मेरी बात को भी सुनने लगे अब वह मेरी बात को सुनते हैं और भेदभाव को भी काम कर दिया है अब वह अपनी बच्ची को भी किसी काम को करने के लिए मना नहीं करते हैं जैसे मार्केट जाना या कहीं शादी विवाह में जाना अब तो वह सोचते हैं कि काश हम पहले अपने बेटी का नाम स्कूल में लिख दिया होता तो आज कुछ और पढ़ ली होती

हम इस प्रोजेक्ट को लागू किया तो हमको बहुत सारी चुनौतियों को सामना करना पड़ा लोग कहते थे कि तुम हमको ज्ञान दोगी हम तो खुद ही तुमसे बड़े हैं तुमसे समझदार हैं यह सब तुम अपने घर में जाकर समझो लेकिन जब हम बार-बार गए और अपनी सहेलियों के साथ के तब उनको समझ में आने लगा कि नहीं सभी लड़कियां गलत नहीं हो सकती एक बार उनकी बात को सुनाई चाहिए और समझनी चाहिए जिससे देखा जाए कि क्या प्रभाव होता है फिर हमारी बच्चियों भी उनकी बात को सुनी तो उनके साथ होने लगी और उनका सहयोग करने लगे और खुद उनके साथ जाकर लोगों को बताने लगी तो मुझे कर हुआ कि नहीं मेरी बेटी भी कुछ कर सकती है

30 दिन से अधिक

लैंगिक समानता

पहले हमारे घरों में हमारे मम्मी के साथ भेदभाव होता था तुम मुझे बहुत खराब लगता था लेकिन मेरे साथ जब भेदभाव होना शुरू हुआ तो मैं उसे चीज को उसका विरोध किया और मैं बताया कि मैं खुद भाई जैसे कर सकती हूं भाई जैसे बन सकती हूं और खुद मेहनत करती हूं और भाई से अच्छा नंबर मेरा आता है तो मेरी बात मेरे घर वाले मानने लगे तो मुझे लगा कि नहीं यह समस्या है हर घरों की बात है और मुझे देखने को भी मिलता है तब मैं लोगों को बताने लगी कि यह गलत है और इसको सुधार किया जाए भेदभाव करना गलत है भेदभाव नहीं करना चाहिए

Step 4 साझा करें

हमने अपनी प्रोजेक्ट को पहले स्कूल के साथियों के साथ ग्रुप बनाकर अपने मोहल्ला के लोगों को जाकर अपने प्रोजेक्ट के बारे में बताया और समझाया पहले तो लोग हम लोगों की बात को सुनने के लिए तैयार नहीं होते थे लेकिन जब हम अपने सर के साथ गए और लोगों को बताएं तब जाकर हमारे आसपास के लोग हमारी बात को सुने और हमें शाबाशी देने लगे

20-50

मैंने अपने प्रोजेक्ट को प्रभावित बनाने के लिए अपने दोस्तों की एक टोली बनाकर अपने मोहल्ले में लोगों को जाकर लैंगिक असमानता के बारे में और उससे संबंधित जानकारी दी कि आजकल के जमाने में ना तो लड़की किसी से कम है और ना ही औरत किसी आदमी से कम है जो आदमी काम कर सकता है वह औरत भी काम कर सकती है और जो काम को लड़का कर सकता है उसे काम को लड़की भी कर सकती है इसलिए लड़के लड़कियों में भेदभाव नहीं करना चाहिए लड़कों से ज्यादा तो लड़कियां अपने मां-बाप की सेवा करती हैं केवल कहना है की लड़कियां पराया घर की बेटी होती हैं जबकि लड़कियों को सबसे ज्यादा मायका और ससुराल दोनों को देखना पड़ता है